प्रेम का बंधन

अमेजन, फ्लिपकार्ट एवं गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध काव्य संग्रह “ढाई आखर प्रेम के” में प्रकाशित “प्रेम का बंधन” काव्य रचना आपके सामने प्रस्तुत हैं —

उर के बंधन से ज़ब मुक्त हुआ मन,

तब मिलन प्रेम का हो जाता है |

वीणा के झंकृत तारों -सा,

हृदय भी रागमय हो जाता है |

सागर के दो दुकूल बने हमराही वो,

दिल उनका वीचि बन क्रदंन करता है |

लहरों का उद्देलन भी अश्रु बन उनके,

यूँ वियोगी मन का रुदन गाता है |

आस नहीं टूटेगी उनकी,

ये शौर लहरों का कहता है |

एक दिन घटा छटेगी आँधियों की,

ठहराव धारा का ये कहता है |

जीवन का हर चक्र यही,

ये सीख हमें दे जाता है |

ये दुनिया प्रेम की भूखी है,

नवरूपों में कथा कह जाता है |

कभी अडिग विश्वास का सेतु बन,

ये अचल प्रेम का किस्सा कहता है |

ये प्रेम प्रतीक का राम सेतु है,

सिय – राम की गाथा कहता है |

स्वरचित
✍️✍️✍️डॉ गरिमा त्यागी

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